आलेख देवेन्द्र गुप्ता

आलेख : सनातन धर्म के एकता के परिचायक-राजिम कुंभ

भारतवर्ष के कल्याण के प्रार्थना राजिम कुंभ
सनातन धर्म के ध्वजा फहरात राजिम कुंभ

छत्तीसगढ़ म पैरी, सोंढूर अऊ महानदी के तट म स्थित पावन नगरी राजिम म हर बछर कुंभ मेला के आयोजन करे जात हे। माघ पून्‍नी ले महाशिवरात्रि तक आयोजित ए भव्य अऊ दिव्य कुंभ म देश भर ले लाखों श्रद्धालु इहां पहुँचथें अऊ त्रिवेणी संगम म स्नान करके पुण्य लाभ अर्जित करथें। ए दौरान इहां देश भर ले हजारों साधु, संत महामंडलेश्वर, महात्मा मन के इहां आना होथे, जिहां ओ मन अपन अमृतवाणी के वर्षा करके देश भर ले आए श्रद्धालु मन के मार्गदर्शन करथें। ये आयोजन अपन आप म अनूठा हे काबर के ये सरकारी आयोजन ये। छत्तीसगढ़ प्रदेश के धर्मस्व कृषि अउ सिंचाई मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के पहल म ए आयोजन बर बकायदा कानून बनाय गए हे। जऊन ल छत्तीसगढ़ विधानसभा म पास करे गए हे। सत्तापक्ष अऊ विपक्ष दुनों दल के विधायक मन ह पुरातन काल ले इही तरीक म चले आत मेला ल कुंभ स्वरूप प्रदान करे के आधारशिला रखे हें।
ए राजिम कुंभ म द्वारिका पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्‍वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज, पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज के सरलग आगमन होत रहे हे। कुछ मनखे मन ह ए आयोजन ल कुंभ कहे म आपत्ति जताए रहिन जऊन म सरकार ह कुंभ के आगू कल्प आखर जोड़ दीस। फेर जगतगुरु शंकराचार्य स्‍वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ह खुद ए आपत्ति ल खारिज कर दीन। उमन कहिन कि त्रिवेणी संगम के जऊन पावन धरा म हज़ारों साधु,संत-महात्मा मन कोति ले मानव कल्याण अऊ धर्म के शिक्षा दे जाथे ओला कुंभ कहे म कोनो आपत्ति नइ होना चाही। उमन स्पष्ट रूप ले कहिन कि सनातन धर्म म ओ मन ल शंकराचार्य के मान्यता मिले हे, ए नाते उमन स्‍वयं ए आयोजन ल कुंभ के रूप म प्रमाणित करत हें।




परंपरानुसार राजिम कुंभ के शुभारंभ माघ पूर्णिमा दिन भगवान राजीव लोचन के पूजा अर्चना विधानसभा अध्यक्ष करथें। ए आयोजन के एक सबले बढिया बात ये हे कि कबीर पंथ, सतनाम पंथ संग सबो पंथ के धर्मगुरु एक मंच म विराजमान होथें। ये दृश्य अपन आप म अद्भुत होथे। जातिवाद के कुरीति अहां नइ दिखाय। इहां सैकड़ों के संख्या म नागा साधु घलोक पहुंचथें। सबो साधु-संत मन बर अस्थाई आश्रम व कुटिया प्रशासन बनाके देथे। जिहां श्रद्धालुगण अपन गुरु मन के संग सत्संग करथें। इहां एक अउ अच्‍छा बात हे कि इहां संत समागम म सबो संत अपन-अपन विचार, प्रवचन ओसरी-पारी ले रखथें। श्रद्धालु कोनो समय संत समागम पहुंचयं अमृत रूपी ज्ञान खच्चित मिलथे।
कुंभ के आखरी दिन महाशिवरात्रि म आखरी शाही स्नान बर हज़ारों साधु संत मन के भव्य शोभायात्रा राजिम नगर के भ्रमण करथे। ए शोभा यात्रा के अगुवाई नागा साधु करथें, भ्रमण के बाद ओ मन त्रिवेणी संगम म स्नान करके कुंभ के समापन करथें। ए दिन करीबन 5 लाख श्रद्धालु राजिम पहुंचथें।
ए राजिम कुंभ ल नवा स्वरूप प्रदान करके विश्व पटल के आघू रखइया छत्तीसगढ़ प्रदेश के धर्मस्व, कृषि अउ जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल कहिथें कि छत्तीसगढ़ के ये धरा पुरा-संपदा ले परिपूर्ण हे। इहां के धार्मिक ऐतिहासिक मान्यता जऊन हे ओला दुनिया के आघू लाय के हमन उदीम करे हवन। इहां मैं छत्तीसगढ़ के परंपरा के उल्लेख करना उचित समझथंव जेमा मान्यतानुसार ममा अपन भांचा ल पांव नइ छूनवन देवय। एखर पीछू प्रभु राम के कहानी हे, हर ममा अपन भांचा ल प्रभु राम के स्वरुप म देखथे। ये छत्तीसगढ़ वासी मन के आचरण म हे। हम अइसन ऐतिहासिक धार्मिक स्थल मन ल उंखर पहिचान दुनिया ल बताय के उद्देश्य ले कई ठन महोत्सव मन के आयोजन घलोक करत रहिथंन। बृजमोहन ह कहिन कि धार्मिक मान्यता मन के अनुसार इलाहाबाद हरिद्वार जइसे तीर्थ धाम के अपन महत्ता हे। फेर राज्य के बहुत अकन गरीब मनखे उहां जा सकंय ओ मन अपन कर्मकांड राजिम के त्रिवेणी संगम म ही करथें।




चित्रोत्पला माने महानदी मइया के तट म हरिद्वार के जइसे ही गंगा आरती के आयोजन होथे। जेमा हज़ारों श्रद्धालु सामिल होथें। अइसे म हमन पुरातन काल ले चले आत राजिम के परंपरा ले सबो ल अवगत कराए हवन अऊ इलाहाबाद-हरिद्वार के जइसे एखर महत्ता ल घलोक हम आघू लावत हवन। सनातन धर्म के धार्मिक तीर्थ के रूप म राजिम ल अब सबो मनखे जाने लगे हें।
राजीम ल विश्व पटल म उभारे बर जउन अभिनव प्रयास करे जात हे इही कड़ी म राजिम कुंभ 2018 म तीन अइसे आयोजन करे गए हे जऊन पूरा दुनिया के ध्यान एखर कोति खींचे हे। नदी संरक्षण अउ संवर्धन बर राजिम कुंभ के बेरा म नदी मैराथन के आयोजन करे गीस। जेमां क्षेत्र के करीबन 12000 मनखे मन ह हिस्सा लीन। अइसनहे 7 फरवरी के दिन भारतवर्ष के समृद्धि अउ संत मन के अभिनंदन बर 361000 दीया के प्रज्वलन करके विश्व कीर्तिमान रचे गीस। एकर बाद जानकी जयंती के दिन 21सौ श्रद्धालु मन ह जल संरक्षण संवर्धन अऊ विश्व शांति के नव चेतना जागृत करे बर एक संग शंखनाद करके इतिहास रचिन। ये दुनों आयोजन मन ल गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड म जघा मिल गए हे।
राजिम कुंभ क्षेत्र के विकास बर छत्तीसगढ़ सरकार सरलग काम करत हे। इहां हरिद्वारा के लछिमन झूला के तर्ज म जल संसाधन विभाग के संग 30 करोड़ के लागत ले एक किलोमीटर लंबा सस्पेंशन ब्रिज बनाए जात हे। ए ब्रिज के माध्यम ले राजीव लोचन मंदिर ले नदी क्षेत्र के बीच स्थित कुलेश्वर महादेव मंदिर तक पहुंचे जा सकही। अइसनहे नदी के बीचों-बीच 35 करोड़ के लागत ले समर्सिबल सड़क घलोक बनइया हे। ये सड़क नदी म आए बाढ़ म बुड़ घलोक जाही तभो खराब नइ होवय न बोहावय।
पौराणिक मान्यता
छत्तीसगढ़ प्रदेश ल पुरातन काल म कौशल प्रदेश कहे जात रहिस जिहां प्रभु श्रीराम के माता कौशल्या के जन्म होय रहिस। एखर संगेच अइसे मान्यता हे कि प्रभु श्री रामचंद्र जी ह अपन वनवास के सबले जादा समें 10 साल छत्तीसगढ़े म बिताएं हें। राजिम के त्रिवेणी संगम म स्थित कुलेश्वर महादेव के मंदिर घलोक माता सीता ह बनाय हे, अइसे किवदंती हे। एकरे तीर म लोमश ऋषि के आश्रम हे ए बात मन ल लेके कई ऐतिहासिक प्रमाण घलोक मौजूद हे।
देवेन्द्र गुप्ता
लेखक कैबिनेट मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के मीडिया प्रभारी हें



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