श्रीश्री रविशंकर हर ‘वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल’ के बेरा म यमुना के डूबान क्षेत्र म होए नुकसान बर केंद्र सरकार अऊ एनजीटी ल दोषी बताए रहिन हे।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) हर आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ल ऊंखर ये बयान ल लेके जोरदरहा फटकार लगाए हे। खबर के मुताबिक एनजीटी ह एक याचिका के सुनवाई के समय ऊंखर बयान ल स्तब्ध करे वाला बताइस अऊ कहिस कि आपला अपन जिम्मेदारी के कोनो एहसास नइ हे। आप मन ल बोले के आजादी हे त का आप मन कुछू भी बोल दुहू। श्री श्री रविशंकर हर मार्च, 2016 मं ‘वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल’ के बेरा म यमुना के डूबान क्षेत्र ल होय नुकसान बर केंद्र सरकार अऊ एनजीटी ल दोषी बताए रहिस। उमन दलील दे रहिन कि उखर संस्था ह कार्यक्रम बर एनजीटी संग जम्मो संस्था मन से जरूरी अनुमति लेहे रहिस।

न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार के अध्यक्षता वाले पीठ हर याचिकाकर्ता मेर श्रीश्री रविशंकर के बयान के कॉपी प्राधिकरण ल सौँपे बर कहे हे ताकि मुकदमा कागद मन मं एला संघरे जा सकय।  वोति, आर्ट ऑफ लिविंग (एओएल) हर एनजीटी के विशेषज्ञ समिति के रिपोट म आपत्ति दर्ज करत एकर विरोध करे हावे। संगे-संग ओ हर एनजीटी से एला खारिज करे के अपील घलोक करे हावे. एनजीटी ह मामला के अगला सुनवाई के तारीक नौ मई तय के हवय।

एखर से पहिली विशेषज्ञ समिति ह अपन रिपोट मं कहे रहिस कि एओएल के आयोजन हर यमुना के डूब क्षेत्र मं भारी नुकसान करे हे। समिति हर ए नुकसान के भरपाई म 13.29 करोड़ रुपया के खरचा आए अऊ येमां करीब 10 साल के समय लगे के बात कहे रहिस। एखर ले पहिली एनजीटी हर यमुना डूब क्षेत्र के पारिस्थितिकी अऊ जैव विविधता ल नुकसान पहुंचाए बर संस्था ऊपर पांच करोड़ रुपये के जुर्माना लगाए रहिस। पाछू साल जून मं एओएल हर एखर आखिरी किश्त देहे रहिस।