महिलाओं का जागरूक एवं सशक्त होना आवष्यक- श्रीमती हर्षिता पाण्डेय





अम्बिकापुर 27 फरवरी 2017, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा महिलाओं को संविधान प्रदत्त अधिकारों के प्रति जनप्रतिनिधियों को जागरूक करने के उद्देष्य से आज जिला पंचायत कार्यालय सरगुजा के सभाकक्ष में जिला एवं जनपद स्तरीय जनप्रतिनिधियों का ’’महिलाओं से संबंधित कानून’’ विषय पर एक दिवसीय कार्यषाला सह प्रषिक्षण का आयोजन किया गया।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती हर्षिता पाण्डेय ने कार्यषाला को संबोधित करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता के लिए महिलाओं का अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना आवष्यक है। महिलाएं अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होकर एक सषक्त समाज के निर्माण मेें महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर सकती हैं। सामाजिक सुदृढ़ता के लिए महिलाओं का सषक्तिकरण जरूरी है। उन्होंने बाल विवाह, दहेज एवं टोनही प्रथा तथा घरेलू हिंसा पर व्यापक प्रकाष डालते हुए जनप्रतिनिधियों से जागरूक होकर इनका विरोध करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त कुप्रथाओं एवं कुरीतियों को दूर करने के लिए जनप्रतिनिधियों की जागरूकता एवं सक्रियता आवष्यक है। जनप्रतिधि अपने कार्य क्षेत्र में महिलाओं की जागरूकता पर विषेष जोर देते हुए उनके अधिकारों को संरक्षित करने पर विषेष ध्यान दें, ताकि महिलाएं पूरे स्वाभिमान के साथ अपनी योग्यता एवं हूनर का उपयोग करते हुए स्वतंत्रतापूर्वक जीवन निर्वहन कर सकें। महिलाएं यदि सषक्त होंगी तो निष्चित ही समाज सषक्त होगा तथा समाज विकास के पथ पर निंरतर अग्रसर रहेगा।
श्रीमती पाण्डेय ने बाल विवाह के प्रति जनप्रतिनिधियों को जागरूक करते हुए कहा कि बाल विवाह एक समाजिक बुराई के साथ ही दण्डनीय अपराध भी है। इसके तहत 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के एवं 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की की विवाह प्रतिबंधित है। इस काूनन के अनुसार बाल विवाह के बंधन में आने वाले बालक एवं बालिका को अपना विवाह शून्य घोषित कराने का अधिकार है। कार्यषाला में घटते हुए लिंग अनुपात को दृष्टिगत रखते हुए समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए नोनी सुरक्षा योजना के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया गया। इस योजना के तहत पंजीकृत बालिका का 18 वर्ष तक विवाह न होनें एवं बारहवीं कक्षा तक षिक्षा पूर्ण होने पर वित्तीय संस्था द्वारा एक लाख रूपये अथवा उस समय तक शासन द्वारा निर्धारित परिपक्वता राषि देने का प्रावधान है, जो एक लाख रूपये से कम नहीं होगी। कार्यषाला में बताया गया कि किसी महिला पर टोनही होने का आरोप लगाना एक दण्डनीय अपराध है। प्रायः देखा गया है कि समाज की किसी विधवा, परित्यक्ता एवं एकाकी महिला पर टोनही होने का आरोप लगाकर समाज के लोगों द्वारा उसे प्रताड़ित किया जाता है। इस दौरान घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को कानूनी संरक्षण एवं षिकायत दर्ज कराने के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। कार्यषाला में बताया गया कि पुलिस स्टेषन में एफआईआर दर्ज कराये बिना भी पीड़ित महिला की सुनवाई महिला बाल विकास विभाग की संरक्षण अधिकारी के माध्यम से की जा सकती है। पीड़ित महिलाएं अपनी षिकायत वेबसाईट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.सीजीमहिलाआयोग.कॉम पर ऑनलाईन दर्ज करा सकती हैं। कार्यषाला को जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती फुलेष्वरी सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा भी संबोधित करते हुए महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण पर विषेष ध्यान देने का आह्वान किया गया। बैठक में आयोग के सचिव श्री आर.जे. कुषवाहा सहित जनपद अध्यक्ष श्रीमती पूनम टेकाम, श्रीमती पति बाई एक्का, उपाध्यक्ष श्री अटल बिहारी यादव, श्री शैलेष सिंह, श्री राजू कुमार सिंह, जिला पंचायत सदस्य श्री देवनाथ उंजन एवं अन्य जनप्रतिनिधि, संरक्षण अधिकारी श्रीमती सुलेखा कष्यप तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।


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About gurturgoth.com

ठेठ छत्तीसगढ़िया. इंटरनेट में 2007 से सक्रिय. छत्तीसगढ़ी भाषा की पहली वेब मैग्‍जीन और न्‍यूज पोर्टल का संपादक. पेशे से फक्‍कड़ वकील ऎसे से ब्लॉगर.
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