न्यायिक निर्णय मन मं आवेग अऊ निजी विचार मन बर कोनो जघा नइ होवय - जस्टिस दीपक मिश्रा

संस्थागत नैतिकता मं न्यायापालिका के भूमिका विसय म कार्यशाला






बिलासपुर, 23 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा हर कहिस कि एक जज ल भावुक तो होना चाही फेर फैसला मन मं आवेग अऊ व्यक्तिगत विचारधारा प्रगट नइ होना चाही, ओ मन ल संविधान अउ कानून के मुताबिक ही निर्णय देना चाही।
छ्त्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा आयोग अऊ छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी कोति ले आज हाईकोर्ट आडिटोरियम मं एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित करे गीस। ए सम्मेलन मं न्यायाधीश मन के संस्थागत नैतिकता विसय म जस्टिस मिश्रा हर विचार रखिन। उमन कहिन कि न्यायिक संस्था के स्वतंत्रता ल बनाए रखे बर, न्याय के खातिर लोगन मं सम्मान बने रहना चाही, न्याय के सर्वोच्चता स्थापित रहय अऊ न्याय उपर लोगन के आस्था बने रहय एखर बर संस्थागत नैतिकता अनिवार्य हे। उमन कहिन कि एक जज कोर्ट के ड्यूटी के बेरा अऊ ओखर बाद अलग-अलग भूमिका मन मं नइ रह सकय। ओला कोर्ट के बाहिर घलोक नैतिकता के ऊंचहा मापदंड मन के पालन करना होही।
जस्टिस मिश्रा हर कहिन कि एक जज के ताकत ओखर अपन नैतिक मूल्य अऊ आदर्श मन के पालन ह ही हे। ओला अपन मार्गदर्शक खुदे ल बनना होही अऊ अपन मूल्य खुदे स्थापित करे ल होही। जज मन के शारीरिक गतिशीलता उपर जोर देवत जस्टिस मिश्रा हर कहिन कि उमन ल ना सिरिफ अपन स्वास्थ्य ल बेहतर बनाए रखे म ध्यान देना चाही भलुक दिमाग ल घलोक हमेसा सजग रखना होही, जेखर लाभ ओ मन ल न्यायिक काम सम्पादित करे मं मिलही।
बिलासपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन हर अध्यक्षयीय उद्बोधन मं प्रदेश के न्यायिक अधिकारी मन ले कहिन कि ओ मन न्यायिक विषय मन के अध्ययन करे बर नियमित रूप ले समय निकालंय, एखर बर न केवल किताब बल्कि कम्प्यूटर, इंटरनेट म मिले सामान के घलोक मदद लेवव। एखर ले आप मन के न्यायिक दक्षता मं सुधार होही।
जस्टिस राधाकृष्णन हर आगाह करिन कि जज मन ल संविधान, कानून, प्रशासन आदि के प्रहरी कहे जाथे फेर ये घलोक ध्यान रखव कि देश के आम मनखे घलोक हमार कामकाज के मूल्यांकन करत हें अऊ ओ मन हमला देखते हंवय। हमला अपन निर्णय, प्रदर्शन अऊ सम्पर्क ल लेके हमेसा सचेत रहे के जरूरत हे।
उद्बोधन के पाछू प्रश्नोत्तर के सत्र चलिस जेमां प्रतिभागी जज मन के जिज्ञासा के समाधान जस्टिस मिश्रा अऊ जस्टिस राधाकृष्णन हर करिन। एखर पहिली जस्टिस प्रशान्त मिश्रा हर अतिथि मन के स्वागत करिन गीस अऊ सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा के परिचय दीन। उमन जस्टिस मिश्रा के बहुत अकन बड़का फैसला मन के उल्लेख करत कहिन कि ओ मन अध्येता हें। दर्शन, इतिहास, कला, संस्कृति मं उंखर रुचि तो हावेच संगें-संग उंखर प्रशासनिक कार्यकुशलता घलोक अद्भुत हे। जस्टिस संजय के अग्रवाल हर अतिथि मन के आभार व्यक्त करिन। ए सम्मेलन मं हाईकोर्ट जज, प्रदेश भर के न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज, जिला जज अऊ आन न्यायिक अधिकारी सामिल होइन।


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About gurturgoth.com

ठेठ छत्तीसगढ़िया. इंटरनेट में 2007 से सक्रिय. छत्तीसगढ़ी भाषा की पहली वेब मैग्‍जीन और न्‍यूज पोर्टल का संपादक. पेशे से फक्‍कड़ वकील ऎसे से ब्लॉगर.
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