अमन के लेख का निहतार्थ एवं भरोसेमंद मीडिया

आज के किसी समाचार पत्र में मुख्‍यमंत्री के सचिव श्री अमन सिंह का एक लेख प्रकाशित हुआ है। वेब मीडिया में इस आलेख पर प्रतिक्रियायें आ रही हैं एवं संभव है कि, सत्‍ता और सत्‍ता के गलियारे से परे इस पर चर्चा भी हो रही होगी। सत्‍ता के नियामक समय-समय पर इस प्रकार से लेख लिखते रहे हैं एवं मीडिया इसे प्रमुखता से प्रकाशित भी करते रही है। इससे सरकार एवं प्रशासन की मंशा और रूख का अहसास सामान्‍य जन को होता है।
रमन सिंह के नेतत्‍व वाले सरकार में उनके मुख्‍य सिपहसालारों में अमन सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। सोसल मीडिया में यह लिखा जाता है कि प्रदेश को रमन नहीं अमन चला रहे हैं। अमन के प्रशासनिक व नेतत्‍व क्षमता को प्रदेश की जनता महसूस कर रही है। उन्‍होंनें नेपथ्‍य में रहते हुए सरक-सरक कर चलने वाली कार को द्रुत गति से विकास के लक्ष्‍य की ओर आगे बढ़ाया है।
इतने लम्‍बे प्रशासनिक अनुभव एवं शासन के केन्‍द्र में रहकर नेतत्‍व को लगातार प्रभावित करते रहने वाले व्‍यक्ति का विश्‍वास, इस आलेख में, शब्‍दों में प्रकट हुआ। साथ ही यह भी दर्शित रूप से स्‍पष्‍ट हुआ है, कि छत्‍तीसगढ़ की मीडिया और अमन सिंह का परस्‍पर मजबूत भरोसा है। इस बात का निहतार्थ यह कि छत्‍तीसगढ़ सरकार को छत्‍तीसगढ़ के मीडिया पर भरोसा है और छत्‍तीसगढ़ के मीडिया को भी सरकार का भरोसा है। किन्‍तु इसके पीछे का पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट यह भी कि सरकार जो चाहेगी वही मीडिया में आयेगी। प्रश्‍न यह भी महत्‍वपूर्ण है कि, आखिर ऐसी क्‍या आवश्‍यकता आन पड़ी कि अमन को अपने इस आलेख को मीडिया के सामने लाना पड़ा। मेरी मति में ऐसे बहुतेरे अंतहीन प्रश्‍न हो सकते हैं जिनका जवाब तलाशना प्रश्‍न को जिन्‍दा रखने के जुगत होते है।
अमन के आलेख का प्लाट तब तैयार हुआ, जब प्रदेश के पचहत्‍तर नामचीन पत्रकारों के ब्‍हाटस एप ग्रुप में, अमन के स्‍मार्ट फोन से सरकारी गोपनीय नोट गलती से प्रसारित हो गया। अमन नें इस बात पर अपनी चिंतन प्रक्रिया के साथ ही कई पहलुओं पर अपनी बात रखी है। उस गोपनीय नोट को प्रसारित न करने के अमन के अनुरोध का सभी ग्रुप मेंबरों नें न केवल, मान रखा बल्कि पत्रकारिता के पेशेगत अलिखित संविधान का भी मान रखा। उन्‍होंनें अपने इस आलेख में विश्‍वास को यकबक रीत जाने के बजाए उसके सीजन को खतरनाक बताया है। इस पूरे वाकये में अमन नें मानवीय विश्‍वास का बेहतर अर्थान्‍वयन करते हुए, नये तकनीकि के खतरों के प्रति भी आगाह किया है। इसका सुखद पहलु यह कि इन दोनों स्थितियों में, खतरनाक तकनीकि चूक को, मानवीय संवेदना, निश्चिंतता के साथ उबार लेती है। यह भी कि, सिद्धि एक प्रक्रिया है जिसमें चूक की संभावना होती है।
सिर्फ टीपीआर और ब्रेक्रिग के लिए सूचनाओं को सनसनीखेज बनाने के लिए इस मौके को लपकने के लिए तैयार, लार टपकाते लोगों की कमी भी नहीं है। जिसके बावजूद विश्‍वास यदि कायम है तो टीआरपी पर, गम्‍भीरता भारी पड़ती है। गोपनीयता एवं निजता पर चर्चा करते हुए इसे उन्‍होंनें स्‍पष्‍ट कर दिया, कि जनहित और राष्‍ट्रहित सर्वोपरि है। ऐसे समय में जब मीडिया के लिए छत्‍तीसगढ़, बहते लहू और बिखरते बारूद का पर्याय है, इस आलेख नें यह बता दिया कि दिल्‍ली के चश्‍में से परे, विकास की ओर अग्रसर छत्‍तीसगढ़, भी है। यह नक्‍सलवाद के टीसों के साथ ही खुशहाल छत्‍तीसगढ़ के ‘अमन’ का पैगाम है। मैं अमन सिंह सहित मेरे उन 75 नामचीन पत्रकार बंधुओं का शुक्रिया अदा करता हूं जिन्‍होंनें छत्‍तीसगढ़ के तासीर और पहचान को सिद्ध किया है।
– संजीव तिवारी
संपादक
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About gurturgoth.com

ठेठ छत्तीसगढ़िया. इंटरनेट में 2007 से सक्रिय. छत्तीसगढ़ी भाषा की पहली वेब मैग्‍जीन और न्‍यूज पोर्टल का संपादक. पेशे से फक्‍कड़ वकील ऎसे से ब्लॉगर.
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