पर्यटन स्थल ’जतमई’ तीर विकसित होही औषधीय पौध संरक्षण क्षेत्र

गुरू पूर्णिमा के अवसर म होइस शुभारंभ: करीबन 500 एकड़ म लगाए जाही औषधीय पौधा

रायपुर, 10 जुलाई 2017। राजधानी रायपुर के नजदीक गरियाबंद जिला म स्थित प्रसिद्ध प्राकृतिक अउ धार्मिक पर्यटन स्थल ’जतमई’ के तीर-तार करीबन 200 हेक्टेयर (500 एकड़) रकबा औषधीय पौध संरक्षण क्षेत्र के रूप म विकसित होही। छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह ह कल गुरू पूर्णिमा के पावन अवसर म जतमई म आयोजित कार्यक्रम म औषधीय प्रजाति के पौधा लगाके ए परियोजना के शुभारंभ करिस। 
बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. शर्मा ह शुभारंभ समारोह के अध्यक्षता करिन। महासमुन्द लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री चंदूलाल साहू अऊ छत्तीसगढ़ वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री श्रीनिवास मद्दी समारोह म विशेष अतिथि के रूप म सामिल होइन। ए अवसर म जतमई म पारम्परिक हर्बल उत्पाद केन्द्र के शुभारंभ घलोक करिन। छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह ह अपन उदबोधन म कहिन कि छत्तीसगढ़ के हर जिला म औषधीय पौध संरक्षण क्षेत्र (एमपीसीए) विकसित करे जाना चाही। ए क्षेत्र मन म औषधीय पौधा लगाए ले पर्यावरण संरक्षण अउ पारम्परिक औषधीय ज्ञान ल बढ़ावा मिलही। डॉ. जी.पी. शर्मा ह औषधीय पौधा के संरक्षण म विनाश विहीन विदोहन पद्धति के उपयोग करे उपर जोर दीन, ताकि भावी पीढ़ी मन बर औषधीय पौधा मन के भण्डार सुरक्षित रहय। लोकसभा सांसद श्री चंदूलाल साहू ह जतमई के औषधीय पौध संरक्षण क्षेत्र विकसित करे बर चयन होए म स्थानीय मनखे मन ल बधाई अउ शुभकामना दीन अऊ कहिन कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति ले इलाज करइया क्षेत्र के पारम्परिक वैद्य मन ल एकर लाभ मिलही। औषधीय पादप बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री शिरीषचंद्र अग्रवाल ह कहिन कि औषधीय पौधा के संरक्षण म रूचि रखइया गांव वाले मन, वनवासी मन अऊ पारम्परिक वैद्य मन ल वन समिति मन के माध्यम ले ए काम ले जोड़े जाही।
राज्य औषधीय पादप बोर्ड के अधिकारी मन ह ए अवसर म बताइस कि औषधीय पौधा संरक्षण क्षेत्र बर अइसन क्षेत्र मन के चयन करे जात हे, जिहां विलुप्त प्रजाति के औषधीय पौधा हे। ए क्षेत्र मन म परम्परागत चिकित्सा के पद्धति के चलन पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित होवत हे। उमन बताइस कि जतमई क्षेत्र म जलप्रपात होए के कारण जलीय अउ पथरीला औषधीय प्रजाति मन के पौधा मिलथे। ए क्षेत्र म मिश्रित वन के संगें-संग वृक्ष प्रजाति मन के संख्या घलोक जादा हे। इहां औषधीय पौधा, लाल शीशम, कुल्लू, भेलवा, डिकामाली, बेल, कोरिया, आंवला, मरोड़फल्ली आदि होथे। जतमई क्षेत्र मन के गांव मन म बहुत अकन पारंपरिक वैद्य तको रहिथें, जऊन पीलिया, पेट दर्द, बुखार, दस्त, सिर दर्द, हड्डी जोड़, सूजन, कमजोरी, गठियावात, कटने, जलने, मिर्गी आदि बीमारी मन के उपचार करथें। उमन बताइन कि औषधीय पौध संरक्षण क्षेत्र विकसित होए ले इहां कुछ वर्ष बाद म औषधीय पौधा के संख्या बढ़ही, जेखर से स्थानीय मनखे मन के आमदनी घलोक बढ़ही। 
Share on Google Plus

About Sanjeeva Tiwari

ठेठ छत्तीसगढ़िया. इंटरनेट में 2007 से सक्रिय. छत्तीसगढ़ी भाषा की पहली वेब मैग्‍जीन और न्‍यूज पोर्टल का संपादक. पेशे से फक्‍कड़ वकील ऎसे से ब्लॉगर.
    Blogger Comment
    Facebook Comment

0 comments:

Post a Comment