जैव उत्पाद ‘डिकम्पोजर’ फसल मन म पोषक तत्व बढ़ाए म उपयोगी

कृषि अपशिष्ट अपघटक अउ जैविक खेती विसय उपर एक दिवसीय कार्यशाला पूरा
रायपुर, 07 जुलाई 2017। जैव उत्पाद ‘डिकम्पोजर’ सबो प्रकार के फसल मन म पोषक तत्व बढ़ाए अउ कीट व्याधि नियंत्रण बर उपयोगी होथे। ये उत्पाद देशी गाय के गोबर ले बनाय जाथे। राज्य कृषि प्रबंधन अउ विस्तार प्रशिक्षण संस्थान के सभाकक्ष म ‘कृषि अपशिष्ट अपघटक अउ जैविक खेती’ विसय म आयोजित एक दिवसीय परिचर्चा सह कार्यशाला म खांटी जानकार मन ह किसान मन बर ये उपयोगी जानकारी दीन। 
राज्य शासन के कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव अउ कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अजय सिंह ह कार्यशाला म खेती-किसानी बर बहु उपयोगी जैविक दवा डिकम्पोजर के उपयोग करे बर किसान मन ल जागरूक करे हर संभव प्रयास करे के बात कहिन। उमन कहिन कि एखर से खेती-किसानी के लागत म कमी लाय के संगें-संग किसान मन के आय दुगना करे के लक्ष्य ल पाय म सफलता मिले हे। राष्ट्रीय जैविक कृषि केंद्र गाजियाबाद के निदेशक डॉ. कृष्णचंद्र ह आधुनिक खेती म फसल अपशिष्ट के प्रबंधन के महत्व उपर प्रकाश डालत वेस्ट डिकम्पोजर के उपयोग अउ महत्व के बारे म विस्तार ले जानकारी दीन। उमन बताइन कि किसान मन ह धान पैरा ल खेते म जला देथें। एखर से मिट्टी के सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाथे। पर्यावरण ल नुकसान घलोक पहुंचत हे। डॉ. कृष्णचंद्र ह बताइस कि पैरा ल सरोए बर डिकम्पोजर के उपयोग करना बेहद लाभदायक होथे। डिकम्पोजर ल हल्का सिंचाई करे जइसे पैरा म छिंचना चाही। एखर से 40-45 दिन के अंदर पैरा सर जाथे अऊ बाद म उत्तम किसिम के खाद बन जाथे। उमन बताइन कि डिकम्पोजर के एक शीशी मात्रा ल 200 लीटर पानी अउ दो किलोग्राम गुड़ म मिलाके एला जादा मात्रा म तइयार करे जा सकत हे। एक शीशी डिकम्पोजर के कीमत मात्र 20 रूपिया हे। डॉ. कृष्णचंद्र ह परम्परागत कृषि विकास योजना अउ पी.जी.एस. जैविक प्रमाणीकरण पद्धति के बारे म घलोक विस्तार ले जानकारी दीन। 
कार्यशाला म संचालक कृषि श्री एम.एस. केरकेट्टा छत्तीसगढ़ म जैविक खेती म डिकम्पोजर के उपयोग ल बढ़ावा देहे के मंशा जाहिर करत उहां उपस्थित कृषि विभाग के मैदानी अधिकारी मन ल एखर बर भरपूर सहयोग करे के आग्रह करिन। अपर संचालक कृषि डॉ. एस.आर. रात्रे ह जैविक खेती म फसल अपशिष्ट प्रबंधन उपर विस्तार ले चर्चा करिन। उमन बताइन कि अभी हाल म फसल कटाई बर कम्बाईन हार्वेस्टर के उपयोग बढ़ गए हे। एखर ले फसल के अवशेष खेते म रहि जाथे, जऊन ल किसान मन बाद म जला देथें। ए अवशेष मन ल जलाए ले मिट्टी के सूक्ष्म तत्व नष्ट हो जाथे। डि कम्पोजर के माध्यम ले ए अवशेष मन ल सरोके खाद बनाए ले किसान मन ल बहुत फायदा होही। कार्यशाला म उद्यानिकी,  बीज प्रमाणिकरण संस्थान अउ कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मन ह घलोक भागीदारी दीन।   
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About Sanjeeva Tiwari

ठेठ छत्तीसगढ़िया. इंटरनेट में 2007 से सक्रिय. छत्तीसगढ़ी भाषा की पहली वेब मैग्‍जीन और न्‍यूज पोर्टल का संपादक. पेशे से फक्‍कड़ वकील ऎसे से ब्लॉगर.
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