मुख्यमंत्री ह वरिष्ठ कवि श्री सुशील यदु के निधन म शोक प्रकट करिन

रायपुर, 24 सितम्‍बर 2017। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ह प्रदेश के वरिष्ठ कवि अऊ लेखक श्री सुशील यदु के निधन म गहरा दुःख व्यक्त करिन। डॉ. सिंह ह आज इहां जारी शोक संदेश म कहिन कि छत्तीसगढ़ी भाखा अऊ साहित्य के सेवा म स्वर्गीय श्री सुशील यदु ह अपन पूरा जीवन लगा दीन। उमन तीन दशक ले घलोक जादा समय तक कई ठन पत्र-पत्रिका मन म अपन रचना मन के संग किसान, मजदूर अऊ समाज के आखरी छोर के मनखे मन के दुःख-दर्द ल अभिव्यक्ति दीन अऊ समाज ल सही दिशा देहे के उदीम करत रहिन।
मुख्यमंत्री ह कहिन -छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के संस्थापक अध्यक्ष के रूप म स्वर्गीय श्री सुशील यदु ह राज्य के कई ठन जिला मन म आंचलिक कवि अऊ लेखक मन ल संगठित करके कई सम्मेलन अऊ साहित्यिक आयोजन करिन। उमन कई पुस्तक अऊ काव्य संग्रह मन के सम्पादन अऊ प्रकाशन घलोक करिन। मुख्यमंत्री ह कहिन -श्री सुशील यदु के निधन ले हम सब मन छत्तीसगढ़ के नवा पीढ़ी के एक बहुत प्रतिभावान कवि ल खो देहे हन। उंखर निधन प्रदेश के साहित्य जगत बर अपूरणीय क्षति हे। डॉ. सिंह ह ऊंखर शोक संतप्त कुटुंब के प्रति संवेदना प्रकट करिन अऊ दिवंगत आत्मा के शांति बर ईश्वर ले प्रार्थना करे हें।
आप मन ल बता दन कि श्री सुशील यदु के बीते रात राजधानी रायपुर के ब्राम्हण पारा स्थित अपन निवास म निधन हो गीस। ब्राम्हणपारा म ही उंखर जनम 10 जनवरी 1965 को होय रहिस। ओ मन छत्तीसगढ़ी भाखा के सुपरिचित गीतकार अऊ हास्य व्यंग्य रचनाकार रहिन। अपन संस्था छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के संग उमन साल 1994 ले सरलग रायपुर संग प्रदेश के कई ठन जिला मन म साहित्य सम्मेलन मन के आयोजन करत रहिन। आकाशवाणी अऊ दूरदर्शन ले उंखर रचना मन बेरा-बेरा म प्रसारित होत रहिस। उंखर प्रकाशित पुस्तक मन म छत्तीसगढ़ के बहुत अकन प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन के जीवन उपर केन्द्रित काव्यगाथा ’छत्तीसगढ़ के सुराजी बीर’, कविता संग्रह- ’बनफुलवा’ अऊ ’बगरे मोती’, दू भागों म प्रकाशित छत्तीसगढ़ लोक कलाकार मन के परिचय उपर आधारित ’लोक रंग’, सम्पादित कृति मन म -’स्वर्गीय हेमनाथ यदु व्यक्तित्व अऊ कृतित्व’, स्वर्गीय श्री बद्री विशाल परमानंद के गीत संग्रह ’पिवरी लिखे तोर भाग’, श्री रंगूप्रसाद नामदेव के कविता संग्रह ’हपट परे त हर गंगे’ अऊ स्वर्गीय श्री उधोराम झखमार के हास्य व्यंग्य कविता संग्रह ’ररूहा सपनाय दार-भात’ उल्लेखनीय हे।